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प्रेम का महत्त्व (भाग #२) | Importance of Love (Part #2)

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mehta
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7 months agoBusy6 min read

प्रेम का महत्त्व (भाग #२) | Importance of Love (Part #2)

“समियाए धम्मे आरिएहिं पवेइए”

यही कारण था कि भगवान के समीप पहुंचकर प्रत्येक प्राणी शांति और आनन्द का अनुभव करता था । वह प्रेम के राजमार्ग पर चलने की अनुपम प्रेरणा ग्रहण करता था ।
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सूली पर चढ़े हुए, शरीर पर ठुकी हुई कीलों से, लहूलुहान ईसा ने क्या कहा था ।

ईसा ने कहा था – “प्रभु इन प्राणियों को क्षमा करना, यह जानते नहीं कि वे क्या कर रहे हैं ।”

भगवान महावीर और ईसा का यह अदभुत क्षमाभाव उनकी आत्मा के अनन्त प्रेम का ही परिणाम था । इस प्रेम ने ही उन्हें जन्म-जन्म शुभाशुभ कर्मों से मुक्ति दिलाकर परमात्मा पद पर आसीन कराया था ।

मनुष्य के ह्रदय में करुणा की यह लहर उठती है । इस लहर के साथ वह त्याग की ओर बढ़ता है । उसके इस त्याग से चकाचौंध होकर सोई हुई मानवता जागृत होती है और उस परम त्यागी प्रेमी के जयघोष से आकाश गुंजित होने लगता है । हमारे ह्रदय से यह भावना स्वत: ही उमड़ने लगती है ।

प्रत्येक मानव सम्मान चाहता है । प्रत्येक मानव की अभिलाषा होती है कि उससे सब प्रेम करें, कोई घृणा न करे, कोई असम्मान न करे । यह प्रेम तथा सम्मान प्राप्त करना कठिन भी नहीं है । आवश्यकता इतनी ही है कि मनुष्य यह जान ले कि जो कुछ वह स्वयं अपने लिए चाहता है वही वह दूसरों के लिए भी चाहे, दूसरों को भी दे । यदि एक व्यक्ति अन्य व्यक्तियों से द्वेष करता है तो वह कैसे सम्भव है कि उसे दूसरों का प्रेम मिलेगा ? यदि एक व्यक्ति किन्हीं विशिष्ट सांसारिक पदार्थों अथवा व्यक्तियों में राग रखता है तो वह शुद्ध प्रेम को पहचानता ही नहीं ।

अस्तु, हमें यह जानना चाहिए कि प्रेम वह उच्च स्थिति है जहां न राग है, न द्वेष । राग-द्वेष की तीव्रता जितनी अधिक होगी उतना ही अधिक दुःख होगा । सच्चे सुख का अनुभव करने के लिए राग-द्वेष की कषायमय काली घटाओं को विदीर्ण करना होगा । कहा गया है –

“कषाय मुक्ति: किल मुक्तिरेव: ।”

प्रेम को परमात्मा का स्वरूप कहा गया है । इस कथन में तनिक भी अयथार्थ नहीं है । परमात्मा तो अनन्त प्रेममय ही है । वह अनन्त प्रेम ही उन आत्माओं में अनन्त ज्ञान की सृष्टि करता है ।

परमात्मा सर्वत्र है, अथवा प्रभु का निवास सभी जगह है – ऐसा जब कहा जाता है तब उस कथन का यही आशय है कि प्रेम सर्वत्र है । सिंह के समान क्रूर अन्य कौन-सा प्राणी होगा ? किन्तु उसके ह्रदय में भी प्रेम का निवास है । वह अपने बच्चों से प्यार करता है । वन में अखण्ड प्रेम की ज्योति ह्रदय में धारण कर विचरते हुए अथवा ध्यान-धारण करते हुए मुनियों के चरणों में लोटते हुए सिंह को भी देखा जाता है । क्या यह कोई चमत्कार है ?

हाँ ! प्रेम एक अदभुद चमत्कार है । अत: हम सभी को अपने ह्रदय में बसे हुए शुद्ध प्रेम को पहचानना चाहिए और प्रेम के मार्ग पर नि:शंक होकर चलना चाहिए । हमारे मार्ग की समस्त बाधाएं ओस की बूंदों के भांति हवा में विलीन होती चली जाएंगी । हम जिन्हें भ्रमवश अपना शत्रु मानते होंगे, वे सभी हमारे परम मित्र बन जाएंगे । यह होगा प्रेम का चमत्कार ।

इससे आगे हम प्रेम को एक उदाहरण से समझेगे।

पिछली पोस्ट का जुडाव है -

  1. https://steemit.com/life/@mehta/or-importance-of-love-part-1

The English translation of this post with the help of google tool as below:

"Shiamaiya Dham Arhim Puweye"

This was the reason that every creature experienced peace and happiness after reaching near God. He used to take the unique inspiration of walking on the highway of love.

What was said to the crucified Jesus, on the cross, from the nails stuck on the body.

Jesus had said - "Lord, forgive these creatures, they do not know what they are doing."

This gracious apology of Lord Mahavir and Jesus was the result of the eternal love of his soul. This love had made him savior from the birth of birth and birth, and in the divine office.

This wave of compassion arises in the heart of man. With this wave, he moves towards sacrifice. Due to this renunciation, the sleeping humanity is awakened, and the sky is melted by the hail of the supreme solitaire boyfriend. From our heart, this feeling starts growing up automatically.

Every human wants respect. The desire of every human being is to love him, to do no harm, not to disrespect anybody. It is not difficult to find love and respect. The necessity is that the man should know that whatever he wants for himself, he should give it to others, even to others. If a person hates other people, how is it possible that he will get the love of others? If a person keeps a passion in certain material matter or individuals, then he does not recognize pure love.

Of course, we should know that love is a high position where there is no anger, no hatred. The greater the intensity of anger-malice, the greater the grief will be. To experience true happiness, it is necessary to eradicate the kalayamya black dosages of anger-malice. Having said -

"Kashya Mukti: Kill Muktireev:."

Love has been called the nature of God. In this statement, there is nothing even inaccurate. Paramatma is eternal love. That eternal love creates eternal knowledge in those souls.

Parmatma is everywhere, or the Lord's abode is everywhere - when it is said, then that statement means that love is universal. What other cruel animal would be like a lion? But his heart is also a home of love. She loves her children. In the forest, the light of the unbroken love is seen in the heart, while roaming or meditating, the lion is also seen hanging at the feet of the Munis. Is this a miracle?

Yes ! Love is an amazing miracle. Therefore, we all should recognize the pure love settled in our hearts and should walk on the path of love and be determined by it. All obstacles in our path will go away in the air like the drops of dew. Those who deliberately consider themselves an enemy will all become our best friends. This will be the miracle of love.

Next we will understand love with an example.

प्रेम की Steeming

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